राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की ये यात्रा सिर्फ़ चार घंटे की होगी.
अहमदीनेजाद की इस यात्रा के दौरान संभावना है कि ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइप लाइन पर चर्चा होगी. ये परियोजना काफ़ी समय से लटकी पड़ी है.
अमरीका इस तेल पाइपलाइन का विरोध करता आया है.
उसका मानना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में जुटा है और भारत-पाकिस्तान के साथ तेल परियोजना से ईरान को अलग-थलग करने का अभियान कमज़ोर पड़ जाएगा.
हालांकि हाल में भारत ने स्पष्ट किया है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है या नहीं इसका फ़ैसला अमरीका को नहीं करना चाहिए और इसे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) पर छोड़ देना चाहिए.
अहम दौरा
अपनी भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अहमदीनेजाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगे.
पिछले दो वर्षों में ये दूसरा मौक़ा होगा जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की मुलाक़ात होगी. इस दौरान दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे.
ईरानी राष्ट्रपति के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें ईरान के विदेश मंत्री और वाणिज्य मंत्री मीर क़ाज़िमा शामिल हैं.
इसके पहले अहमदीनेजाद पाकिस्तान से श्रीलंका पहुँचे.
श्रीलंका का कहना है कि ईरान के राष्ट्रपति के दौरे से दोनों देशों के संबंध और मज़बूत होंगे.
ईरान ने श्रीलंका को 1.9 अरब डॉलर का ऋण और विकास परियोजनाओं के लिए मदद देने का वादा किया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है श्रीलंका अब पश्चिमी देशों के बजाए ऐसे एशियाई देशों का रुख़ करने लगा है जो मदद के लिए उसे धन उपलब्ध करा सकें.

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